पता ही नही- कि जुते कहा उतारे थे…

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Life in Ashirvad Hostel was best period of my life. Best moments I ever lived.

All those friends and enjoyments are still deeply buried in my heart. And that is why I often write articles and Poems in my Diary on those days of our lives. Well…I never wrote those article on my blog as they all were Non-veg type! But this poem is very close to my heart, so I am posting it.

You may not understand what i want to say in here, because only those 7-8 friends of my group in Ashirvad can feel these words. We have lived all this words there!

And one more thing…Heading of this poem is from movie Udaan. My darling friend Gopal always recites that poem. We all do.

 

पता नही क्यु आज ‘विजयबुन’ का लेपी खोलने को चुल आया हे,
हेडफ़ोन लगाके, VLC चलाके, ‘मोहमाया’ फ़ोल्डर खोलने को मन कर आया हे,

‘सेम्युअल’ कि डुबडूबा हो गई हे फ़िर भी, उसे  Alleta Ocean दिखाने का खयाल आया हे,
ओर ‘मिश्रा’ के पास से बोटल चुराके, थोडीसी नीट लगाने को जी भर आया हे..

‘गोपाल्’…यार..सच मे भुल गया हु, या फ़िर पता ही नही- कि जुते कहा उतारे थे,
वो रोनाल्डो अपने बिहार ले गया, या फ़िर वो ‘जाट’ ने मारे थे,

अरे यार..जाट क्या घन्टा चुरायेगा, वो जुते नही हमारी यारी थी,
कमीनो…सब चुप क्यु हो? सच कहता हु, वो जुते नही- हमारी दोस्ती की बिमारी थी.

छोड यार…जुते गये भाड मे. मुजे तो अभी ‘घन्टु’ की तोन्द पे पप्पी करने को चुल आया हे,
वो पाणिनि के पेट मे पाप पल रहा हे मेरा, वरना उसेभी जोर से जप्पी करने को दील आया हे,

डर रहा हु कैसे भुल पाउगा वो जिन्दगी Room no- 105 की, मुजे तो वही बार​-बार जिने को जी आया हे,
जिगा हो, हितेश हो, या फ़िर हो वो Gay महाराज​, मुजे तो पुरी आशीर्वाद पे प्यार आया हे.

अबे कमीनो, भुल मत जाना तुम्हारे इस यार को, DJ दरबार को, और परेश अन्डे की दुकान को,
वो सब पुरानी बाते- यादे नही थी, उस दो साल मे ही तुम सबने मुजे जीना सिखाया हे,

सचमे…कसम मेरे ‘जाट’ की- उस दिनो को याद करके मेरी आंखके कोने मे आंसु निकल आया हे,
तुम सबको गले लगाके- ना अंगले कादरिकिरेन कहने को दिल बोडीसे बहार आया हे..

दोस्तो…पल चले जाते नही, हम उसे खो देते हे, भुल जाते हे,
कोलेज तो खतम हो जायेगी थोडी देर मे, मुजे तो बस अभी मेरी दोस्ती की प्रोक्सि का खयाल आया हे….

 

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4 thoughts on “पता ही नही- कि जुते कहा उतारे थे…

  1. donga donga donga …..

    wat a talent .. thanks to ua .jo tuje kone kone me thok ke…esa banaya 😛

    🙂
    nice one donga ! I like it

    Like

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